26. एक सपनो जादू सूं सांचो कोन बण सकअ, ईंमअ खून-पसीनो, मनमअ सोचबो अर कड़ी मेनत लागअ छ। – अज्ञात

 

27. कळ्डा काम नअ करबा बेई म्ह एक आळसी आदमी नअ हेरूं छूं, क्यूंकि वो ऊनअ बेगो-सो करबा को तरीको हेर लेलो। – बिल गेट्स

 

28. कळ्डी मेनत कअ बना फळ लेबो, तो अस्यो छ, जियां थे फसल काटबा की कोसिस कर्या छ, जण्डअ थे बीज बायाई कोनअ। – डेविड ब्‍लाए

 

29. कद्‌यां बी कोई आदमी अणाचुको ग्यानी कोन हियो। – लुसियस अन्‍नायुस सेनेका

 

30. आज का काम नअ कद्‌यां बी तड़का पअ मत छोडो। – बेंजामिन फ्रेंकलिन

 

31. नरी सांची बातां तो हांसी-मजाक मअईं खअदे छ। – एमिनेम

 

32. काम, रोस अर लोब ये तीनू नरक का गेला छ। – कबीर

 

33. कोई बी आदमी का असली चरितर को ठीक जद्‍यां पड़अ छ, जद वो नसा मअ रअ छ। – चार्ली चैपलिन

 

34. दूसरा का काम नअ पूरो करबा सूं कईं गुणा बडिया छ, कि खुद का काम नअ करो, भलांईं वो अदगाबलो ईं करणो पड़अ। – श्री मद्भगवद्‍ गीता

 

35. बायेला नअ माफ करबा की बेई, बअरी नअ माफ करबो जादा सीधो छ। – विलियम ब्लेक

 

36. कसी बी बडी चीजां नअ लेबा बेई, बडिया नअ छोडबा सूं मत चूको। – जान डी राकफेलर

 

37. कस्यो बी काम, जे थांका मन की सक्‍ति नअ जगा दे, वोई धरम छ अर जे काम थांका सरीर नअ कमजोर कर दे, वोई पाप छ। – स्वामी विवेकानन्द

 

38. कोई बी आदमी अपणा कामां सूं बडो हअ छ, अपणा जनम सूं नईं। – चाणक्य

 

39. कोई बी आदमी चलार नास्तिक न बण सकअ। – नेपोलियन बोनापार्ट

 

40. खुद का जीत्यां जीत अर खुद का हार्यां हार। – अज्ञात

 

41. गुणा सूं आदमी की पचाण हअ छ, बडा पद पअ बअठबा सूं नईं, ऊंचा पअ बअठबा सूं कागलो गरुड़ न बणअ। – चाणक्य

 

42. नफरत-नफरत सूं नईं, परेम सूं मटअ छ, या एकदम सांची छ। – गौतम बुद्ध

 

43. चीट्यां चुप रअ’र बी सबसूं चोखी सीख दे छ। – बेंजामिन फ्रैंकलिन

 

44. आपां नअ ईं बात को ठीक पड़अ छ कअ जिन्दगी कांईं छ, जतरअ तो आदी जिन्दगी बीतज्या छ। – जार्ज हेबर्ट

 

45. ज्यां रूंखड़ा नअ आंदी-करस झेलणो पड़अ छ, वांकी जड़ां उण्डी अर घाडी रअ छ। – क्लॉड मैकडॉनल्ड

 

46. ज्यांको जोस पूरो हअग्यो, वांसूं बूडो कोई कोनअ। – हेनरी डेविड थोरिओ

 

47. जीं काम सूं आत्मा दूखअ छ, वोई पाप छ। – महात्मा गांधी

 

48. जिनअ हारबा को डर छ, ऊंकी हार जरूर हअ छ। – नेपोलियन

 

49. जीवन आणन्द लेबा बेई छ, भोगबा बेई कोनअ। – गोर्डन बी. हिन्क्ले

 

50. थे जस्यो सोचअ छ, अस्याई थे बणज्याला। – ब्रूस ली