छाव-छाव मै भूल्याई फूलां की साड़ी।
थोड़ी रोकलै बाबूड़ा थारी रैलगाडी॥(टेर)


पांच कोस सूं भागी आई, भर्यो पसीनो अंग।
चोली तो म्हारी टपक्याई, डील हियो बदरंग।
पीण्ड्यां म्हारी आम गई छै, घणी गाडी॥
थोड़ी रोकलै बाबूड़ा थारी……॥(1)


अतरी सुण बाबूड़ो रोक लीनी गाडी।
गोरी को रूप देख, मोहित हैग्यो छोरो।
कांई गजब की छै, थारी साड़ी॥
थोड़ी रोकलै बाबूड़ा थारी……॥(2)


असी बात मन नहीं सुवावै, सुण बाबू बात।
पर तरिया कै सात मै, थे मतना ताको घात।
थांका ओछा छै बच्यार, या छै दूसरा की लाडी॥
थोड़ी रोकलै बाबूड़ा थारी……॥(3)


आगला टेसण पै म्हारा सासरा की ढाणी।
गाडी नै उण्डै रोक दीज्यो, उतरबा कै ताणी।
बाबूड़ो देखतो रैग्यो रै, उतरगी फूलां की साड़ी॥
थोड़ी रोकलै बाबूड़ा थारी……॥(4)