ढुंढाड़ी कबिता

बचतो रिज्यो रे साथिड़ा

बचतो रिज्यो रे साथिड़ा आयो कोरोना भारी।
वाइरस या इतनो जबर हअ जग मंअ छायो रे।
संकरमण फेलायो काळ कअ घास समायो रे॥(टेर)

ढूंढाड़ का लोगां की मायड़ भासा छ, ढुंढाड़ी

ढूंढाड़ का लोगां की मायड़ भासा छ, ढुंढाड़ी।
ढूंढाड़ का लोग-लुगायां की पचाण छ, ढुंढाड़ी॥(1)


                       ढुंढाड़ी मंअ बोलां, ढुंढाड़ी मंअ गांवां भजन अर गीत।
                       यो काम आज को कोनअ, यातो बरसां पराणी रीत॥(2)

ये जी म्हारअ आवअ रे डील मंअ हेरा

ये जी म्हारअ आवअ रे/माचे रे डील मंअ हेरा।
घर का पूत कुवांरा डोलअ यज माना का फेरा॥(टेर)


लम्बो चोड़ो डील हो गियो डाडी मुछ्यां आ गयी।
म्हारा जस्या छोरा छापरा नअ लुगायां भागई।
म्हारा सूना पलंग पअ डेरा॥
घर का पूत कुवांरा डोलअ यज......॥(1)